अल्बर्ट आइंस्टीन -
“बिना स्वास्थ्य जीवन, जीवन नहीं होता, बल्कि यह दुख और आलस्य की अवस्था होती है।ˮ
आज की इस भाग दौड़ की जिंदगी में हम लोग अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देतें हैं, और अपने सुख- सुविधाओं की पूर्ति में दिन- रात लगे रहते है देश में एसे कुछ ही लोग होगे जो की अपने जीवन में सेहतमंद रहने के नियमों का पालन करते होगें। सुबह उठ के दैनिक योग-व्यायाम स्वास्थ्य के लिय बहुत आवश्यक है, इस समय कोविड-19 के दौरान स्वस्थ रहना जरूरी हो गया है।
आज की व्यस्त जीवन शैली में लोग भोजन का सही सें उपभोग नहीं करते जिसका मुख्य कारण है फास्टफूड की तरफ युवाओं का बढ़ता रूझान जो कि देश में गंभीर बिमारियों का बढ़ता प्रतिशत का मुख्य कारणों में से एक है “लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्कूल जाने वाले 6-8 फीसदी के बीच बच्चे मोटापे से जूझ रहे हैं।‘’ एसा ही हाल हार्ट के मामलों का भी है रिपोर्ट के मूताबिक पुरूषों में 40 फीसदी और महिलाओं में 56 फीसदी मामलों में बढ़ोतरी हुई है । सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्की मानसिक स्वास्थ्य का भी स्वस्थ होना जरूरी है स्वस्थय होने का अर्थ रोग रहित तन का होना ही नहीं, बल्कि तनाव मुक्त मन का होना भी है ।
आज के समय में मानसिक तनाव
के कारण कई प्रकार के विकार से लोग ग्रसित हो रहे है जैसे डिप्रेशन, फोबिया, एंज़ायटी आदि । डिप्रेशन दुनिया
भर में लगभग 280 मिलियन लोग इससे ग्रसित हैं कई लोगों को हमारे देश में इसकी पूरी जनकारी
ना होने के कारण इसको पागल पन का नाम भी दिया जाता है जिस वज़ह से सही समय पर इलाज ना
मिलने पर यह एक जानलेवा बीमारी बन जाती है 2017 में भारतीय चिकित्सा शोध परिषद के अध्ययन
में यह पता चाला की भारत में हर सात में से एक व्यक्ति मानसिक रोग से पीड़ित है । हलांकि
रोग की गंभीरता कम या ज्याद हो सकती है । डिप्रेशन खुदखुशीका सबसे बड़ कारण हैं इसका
भारत में बड़ता प्रतिशत चिंता का विषय है । भारत के युवा होने के कारण से यह हमारी राष्ट्र
के प्रति जिम्मेदारी है कि हम अपने आने वाले कल के भारत के भविष्य की सुरक्षा करे ।
अपने भावी नव युवकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करें । क्योंकि एक स्वस्थय व्यक्ति
सामज और देश के लिए वरदान के सामान्य होता
है और अस्वस्थय व्यक्ति सामज और देश के ऊपर बोझ होता हैं ।

