Wednesday, May 17, 2023

उत्साह और उमंग से भरी मेरी पहली ट्रैकिंग

विभाग के सभी बच्चों को अचानक 19 अप्रैल को हमारी आने वाली यात्रा के बारे में पता चला। जब मैंने गंतव्य के बारे में पूछा, तो मुझे कुंजापुरी के बारे में बताया गया । एक ऐसी जगह जहां मैं पहले कभी नहीं गयी थी। सभी ने कहा कि बहुत सुंदर जगह हैं , लेकिन मैं ट्रेकिंग पर जाने के अवसर को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित था। मैंने पूरी रात इसके बारे में सोचते हुए बिताई और अगला दिन, 20 अप्रैल, मेरे जीवन के सबसे अच्छे दिनों में से एक  था । हमें बस स्टॉप पर सुबह 7 बजे मिलना था, लेकिन हम थोड़ी देर से चल रहे थे। जब हम वहां पहुंचे, तब तक बहुत से लोग नहीं आए थे। हम लगभग 8:30 बजे विश्वविद्यालय से कुंजापुरी के लिए रवाना हुए। रास्ते में दूर पहाड़ो को देख कर जो सुकून मिल रहा था वह वहाँ पहुँचने की बेचेनी को और बड़ा रहा था।

फाइनली, हम पहुंचे और बच्चों को हमारे ट्रेक के शुरुआती स्थान के बारे में सूचित किया। हमें ऊपर की ओर चढ़ना था और सभी बच्चे उत्साहित थे। हमारे ट्रेकिंग ग्रुप की शुरुआत धीरे-धीरे हमारे एचओडी सर ने की और अन्य शिक्षकों ने हमारा मनोबल बढ़ाया।

रास्ते में शक्ति पीठ के दर्शन भी किए और वह हुआ हम सबका लंच ब्रेक वहा पर जो हम पूरी सब्जी यूनिवर्सिटी से लेकर आए थे , सबने खाया पर बंदरो की भीड़ ने मुझे बहुत दारा दिया।

वह से हम आगे चले हमरे कुंजापुरी के लिए रास्ते में इतने खूबसूरत दृश्य देख कर बार-बार ख्याल आ रहा था कि बस यही रह जाए इतना सुकून था कि हम एक दिन में कि कुछ पल के लिए सारी परेशानियाँ सारी चिंताएँ भी भूल गए।

कोई नई- नई तरह की प्राकृतिक पत्तों और पेड़ो के बारे में जाना हमारे  सर समय-समय पर नई-नई प्राकृतिक पत्तों के बारे में बताते रहे, सब लोगों से बात करते-करते पूरा सफर चलता गया, फिर नीचे आने के समय हम गाँव के रास्ते से आए, जो कि एक अनोखा अनुभव रहा। खतरे भरे रास्ते भी मेरे मन के उत्साह को कम नहीं कर पा रहे थे। आगे उतर कर सब टीचर्स और हमने मिलकर मैगी बनाई जो मेरे पहाड़ों में मैगी खाने के सपनों को पूरा होना था।

रात में 8 - 8: 30 बजे तक हम नीचे उतरे हम सब बहुत थक गए थे पर दिल चाहता था कि बस यही रुक गए पर जैसी जिंदगी का नाम है चलना तो हम चल दिए वापस रास्ते में हम सबने खाना खाया और हम सब वापस यूनिवर्सिटी आ गये। जैसा हमारे टीचर्स ने कहा था कि ट्रिप एक दिन की है पर असर 5 दिन रहेगा वह कितनी सही थी पुरे 5 दिन तक पेरो में दर्द रहा पर जो अनुभव मेरी पहली ट्रैकिंग था वह अनमोल और सबसे खास था।

  

उत्साह और उमंग से भरी मेरी पहली ट्रैकिंग

विभाग के सभी बच्चों को अचानक 19 अप्रैल को हमारी आने वाली यात्रा के बारे में पता चला। जब मैंने गंतव्य के बारे में पूछा, तो मुझे कुंजापुरी के ...